विस्तृत उत्तर
तिल-भक्षण षट्तिला का छठा और अंतिम प्रयोग है। तिल और गुड़ से निर्मित सात्विक पदार्थों (लड्डू, खिचड़ी) का भगवान को भोग लगाकर प्रसाद रूप में सेवन किया जाता है।
शास्त्रीय और आयुर्वेदिक महत्व: ऊष्मीय ऊर्जा (Thermogenesis) की उत्पत्ति होती है और शीत प्रकोप से रक्षा होती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से तिल शनि की प्रिय वस्तु है और गुड़ सूर्य का कारक है। सूर्य और शनि (पिता-पुत्र) के मिलन के इस पर्व पर तिल-गुड़ का सेवन कड़वाहट मिटाकर संबंधों में मधुरता लाने का प्रतीक है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक



