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दान का प्रभाव नरक में कैसे पड़ता है?

संक्षिप्त उत्तर

दान का नरक में प्रभाव — पाप नष्ट करके नरक से बचाता है, परिजनों का दान नरक-काल कम करा सकता है, वृषोत्सर्ग से नरक में पड़े पितर 21 पीढ़ियों सहित उद्धार पाते हैं।

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विस्तृत उत्तर

गरुड़ पुराण में दान के नरक पर प्रभाव का वर्णन दो दिशाओं में है — दान नरक से बचाता है और यदि नरक में जाना ही पड़े तो यातना को कम करता है।

नरक से बचाव — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'गोदान करने मात्र से जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।' पाप नष्ट होने पर नरक ही नहीं मिलता। भूमिदान से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट होते हैं।

नरक की यातना कम करना — गरुड़ पुराण में यह भी संकेत है — 'मृत्यु के बाद किए गए पुण्यकर्म भी नरक की यातनाओं को कम कर सकते हैं।' परिजनों द्वारा दिया गया दान यमराज से नरक-काल को कम करवा सकता है।

नरक की शिक्षा — गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'नरक का उद्देश्य आत्मा की शुद्धि करना है।' यह शुद्धि जितनी जल्दी दान से होती है, उतनी जल्दी नरक से मुक्ति होती है।

पितरों का नरक से उद्धार — गरुड़ पुराण के बारहवें अध्याय में — 'जिसके कोई पूर्वज रौरव आदि नरकों में यातना पा रहे हों, इक्कीस पीढ़ी के पुरुषों के सहित वृषोत्सर्ग करने वाला पुत्र उनको तार देता है।' वृषोत्सर्ग एक दान है।

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