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विस्तृत उत्तर
शास्त्रों में तिल-मिश्रित जल की तीन अंजलियों का विशेष महत्त्व बताया गया है। श्लोक के अनुसार जो पितरों को तिल से मिश्रित जल की तीन-तीन अंजलियाँ देता है, उसके जन्म से लेकर तर्पण के दिन तक किए गए पाप तत्काल नष्ट हो जाते हैं। यह विधान तिल जल को पितृ तृप्ति, पाप नाश और आत्मिक शुद्धि का महत्त्वपूर्ण साधन बताता है।
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