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एकादशी📜 पद्म पुराण, भविष्योत्तर पुराण2 मिनट पठन

पापमोचनी एकादशी का क्या महत्व है

संक्षिप्त उत्तर

पापमोचनी एकादशी: चैत्र कृष्ण एकादशी = सर्वपापनाशिनी। जो पाप अन्य उपायों से न मिटें, वे भी नष्ट। कथा: मेधावी मुनि तपोभ्रष्ट → व्रत से मुक्ति। विष्णु पूजा + जप + कथा + जागरण। होली बाद प्रायश्चित भी। पद्मपुराण में माहात्म्य।

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विस्तृत उत्तर

पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। नाम ही इसका महत्व बताता है — 'पाप' + 'मोचनी' = पापों से मुक्ति दिलाने वाली।

महत्व

1सर्वपापनाशिनी

पद्म पुराण में भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि यह एकादशी समस्त जाने-अनजाने पापों का नाश करती है। जो पाप अन्य व्रतों, तीर्थों और दानों से नहीं मिटते, वे भी पापमोचनी एकादशी से नष्ट हो जाते हैं।

2कथा सार

च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी मुनि अप्सरा मंजुघोषा के कारण तपोभ्रष्ट हुए। पश्चाताप में उन्हें पापमोचनी एकादशी व्रत का सुझाव मिला — व्रत करने से पापों से मुक्ति और तप-शक्ति पुनः प्राप्त हुई।

3होली के बाद

चैत्र कृष्ण = होली (फाल्गुन पूर्णिमा) के कुछ दिन बाद। होली में अनजाने पापों (अत्यधिक आमोद-प्रमोद) का प्रायश्चित भी इस एकादशी से।

व्रत विधि

दशमी सायं एक-समय भोजन → एकादशी निराहार/फलाहार → विष्णु पूजा → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जप → पापमोचनी एकादशी कथा → रात्रि जागरण → द्वादशी प्रातः पारण।

फल: सर्वपापनाश, मोक्ष प्राप्ति, आत्मशुद्धि।

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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, भविष्योत्तर पुराण
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