विस्तृत उत्तर
मोहिनी एकादशी वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। यह वर्ष की सर्वाधिक पुण्यदायी एकादशियों में गिनी जाती है।
विशेष महत्व
1. मोहिनी अवतार सम्बंध: स्कन्द पुराण (अवन्तिका खण्ड) के अनुसार समुद्र मंथन के बाद जब देवताओं और असुरों में अमृत को लेकर विवाद हुआ, तब वैशाख शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर असुरों को मोहित किया और देवताओं को अमृतपान कराया। इसी कारण इस एकादशी का नाम 'मोहिनी' पड़ा।
2. मोह नाश: इस व्रत का मुख्य उद्देश्य मोह-माया से मुक्ति है। 'मोहिनी' = मोह को नष्ट करने वाली। जो व्यक्ति इस व्रत को विधिपूर्वक करता है, वह संसार के मोहजाल से मुक्त होता है।
3. महापाप नाश: पद्म पुराण में कहा गया है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से मेरु पर्वत जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। अनेक जन्मों के पाप एक व्रत से क्षय होते हैं।
4. सहस्र गोदान फल: इस कथा को पढ़ने और सुनने मात्र से सहस्र (एक हजार) गोदान का पुण्य मिलता है।
पौराणिक कथा (संक्षिप्त): भद्रावती नगरी में धनपाल का पुत्र धृष्टबुद्धि दुराचारी था। पिता ने निकाल दिया। वन में भटकते हुए कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम पहुँचा। ऋषि ने वैशाख शुक्ल एकादशी (मोहिनी) का व्रत बताया। व्रत करने से सभी पाप नष्ट हुए और विष्णुधाम प्राप्त किया।
व्रत विधि: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त स्नान → संकल्प → विष्णु पूजा (पीले वस्त्र, तुलसी, पीले पुष्प) → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जप → फलाहार/निर्जला → रात्रि जागरण → द्वादशी प्रातः पारण → ब्राह्मण भोज-दान।
विशेष: मोहिनी एकादशी वैशाख मास में आती है जो स्वयं अत्यंत पवित्र मास है। इसलिए इस एकादशी का फल अन्य एकादशियों से अधिक माना गया है।





