विस्तृत उत्तर
कार्तिक मास (अक्टूबर-नवम्बर) में प्रातःकाल स्नान (कार्तिक स्नान) का विशेष पुण्य:
- 1सर्वाधिक पुण्यदायी मास: पद्म पुराण: 'कार्तिके यत्फलं स्नानात् तत्फलं नान्यतो भवेत्' — कार्तिक स्नान का फल अन्य किसी मास में सम्भव नहीं।
- 1विष्णु प्रिय: कार्तिक = विष्णु का अत्यंत प्रिय मास (जैसे शिव का श्रावण)। कार्तिक स्नान = विष्णु कृपा।
- 1ब्रह्म मुहूर्त स्नान: सूर्योदय से पूर्व (4-5 बजे) ठंडे जल में स्नान = तप। शरद ऋतु = ठण्ड आरम्भ — ठंडे जल स्नान = कठोर तप = अधिक पुण्य।
- 1तुलसी पूजा: कार्तिक = तुलसी मास। स्नान + तुलसी पूजा + दीपदान = त्रिविध पुण्य।
- 1दीपदान: कार्तिक में प्रतिदिन सायंकाल मंदिर/तुलसी/नदी पर दीपदान = विशेष पुण्य।
विधि: ब्रह्म मुहूर्त → नदी/सरोवर स्नान (घर पर = ठंडा जल) → तुलसी पूजा → विष्णु मंत्र जप → दीपदान (सायं)। पूर्ण मास (30 दिन) निरंतर।
लाभ: पाप क्षय, रोग मुक्ति (शरद ऋतु शुद्धि), विष्णु कृपा, सद्गति/मोक्ष।





