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व्रत विधि📜 भागवत पुराण (अष्टम स्कन्ध), विष्णु पुराण, पद्म पुराण2 मिनट पठन

वामन द्वादशी पर पूजा कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

वामन द्वादशी: भाद्रपद शुक्ल 12। वामन अवतार = बलि से तीन पग दान। विधि: वामन प्रतिमा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वामनाय' → कथा पाठ → छत्र (छाता) दान विशेष → ब्राह्मण बालक पूजन-भोज। दान = बलि की महिमा।

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विस्तृत उत्तर

वामन द्वादशी भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि माँगकर तीनों लोकों को नापा था।

वामन द्वादशी पूजा विधि

  1. 1प्रातः स्नान-संकल्प: 'भाद्रपद शुक्ल द्वादश्यां वामनदेव पूजनं करिष्ये।'
  1. 1वामन प्रतिमा स्थापना: भगवान वामन (छोटे ब्राह्मण बालक, छत्र-दण्ड सहित) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  1. 1षोडशोपचार पूजन: पंचामृत अभिषेक, पीतांबर (पीले वस्त्र), चन्दन, तुलसी, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य।
  1. 1मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वामनाय।' 'ॐ त्रिविक्रमाय नमः।'
  1. 1कथा पाठ: भागवत पुराण अष्टम स्कन्ध से वामन अवतार कथा — बलि से तीन पग दान, त्रिविक्रम रूप।
  1. 1छत्र दान (विशेष): वामन भगवान ने छत्र (छाता) धारण किया था। इस दिन छत्र (छाता) दान विशेष पुण्यदायी। जूते-चप्पल दान भी शुभ (वामन ने नंगे पैर चलकर बलि के यज्ञ में गए थे)।
  1. 1ब्राह्मण भोज-दान: ब्राह्मणों को भोजन, दक्षिणा, वस्त्र दान। ब्राह्मण बालक की विशेष पूजा (वामन ब्राह्मण बालक थे)।

विशेष: दक्षिण भारत (केरल) में ओणम पर्व वामन-बलि कथा से ही जुड़ा है। वामन द्वादशी पर दान का विशेष महत्व — क्योंकि दान ही बलि की सबसे बड़ी विशेषता थी।

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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण (अष्टम स्कन्ध), विष्णु पुराण, पद्म पुराण
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