विस्तृत उत्तर
धूप (गूढ़ार्थ): धूप की सुगन्ध वायु तत्त्व का प्रतिनिधित्व करती है और परिवेश से नकारात्मकता को दूर कर दिव्यता का संचार करती है।
धूप मंत्र: 'वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो... धूपमाघ्रापयामि।'
दीप (गूढ़ार्थ): अग्नि तत्त्व का प्रतीक। यह अज्ञानता (तमस्) के अंधकार को मिटाकर ज्ञान (प्रकाश) के उदय का साक्षात् प्रमाण है।
दीप के लिए गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए।
दीप मंत्र: '...दीपं दर्शयामि।'
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