सरस्वती पूजा में आवाहन कैसे करते हैं का सबसे सीधा सार यह है: आवाहन मंत्र: 'आगच्छ देवि देवेशि! तेजोमयि सरस्वति!...' विधि: आवाहन मुद्रा (दोनों हथेलियाँ जोड़कर अंगूठे अंदर) में कलश/प्रतिमा में देवी का आह्वान। अर्थ: निराकार परब्रह्म को सगुण-साकार रूप में...
सरस्वती पूजा विधि जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
•उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
•सरस्वती पूजा विधि श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
•यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।