विस्तृत उत्तर
दुर्गा जी के भोग का वर्णन देवी भागवत और नवरात्रि परंपरा में मिलता है:
दुर्गा को प्रिय भोग
1खीर (पायस) — सर्वोत्तम
दूध और चावल की खीर दुर्गा का सर्वप्रिय भोग माना गया है। देवी भागवत में खीर का विशेष उल्लेख है।
2हलवा-पूरी-चना
नवरात्रि में कन्या पूजन और दुर्गा पूजा में हलवा, पूरी और काला चना का प्रसाद अत्यंत प्रचलित है।
3पंचमेवा
काजू, बादाम, किशमिश, छुहारा, मखाना — मेवे का भोग।
4फल
केला, नारियल, सेब, संतरा।
5श्रृंगार भोग
दुर्गा को श्रृंगार भी भोग स्वरूप अर्पित किया जाता है — सिंदूर, चूड़ियाँ, लाल चुनरी।
नवरात्रि में नवदुर्गा अनुसार भोग
| दिन | देवी | भोग |
|-----|------|-----|
| 1 | शैलपुत्री | गाय का घी |
| 2 | ब्रह्मचारिणी | शक्कर और पंचामृत |
| 3 | चंद्रघंटा | दूध और खीर |
| 4 | कूष्मांडा | मालपुआ |
| 5 | स्कंदमाता | केला |
| 6 | कात्यायनी | शहद |
| 7 | कालरात्रि | गुड़ |
| 8 | महागौरी | नारियल |
| 9 | सिद्धिदात्री | तिल |
भोग के सामान्य नियम
- 1सात्विक भोग — मांसाहार कदापि नहीं
- 2प्याज-लहसुन रहित
- 3नमक कम — कुछ परंपराओं में नमक रहित
- 4ताजा बना भोग
दुर्गा को वर्जित
शाक्त तंत्र में 'पंचमकार' (मत्स्य, माँस, मद्य, मुद्रा, मैथुन) का उल्लेख है — किंतु यह उच्च तांत्रिक साधना का विषय है। सामान्य पूजा में सात्विक भोग ही श्रेष्ठ है।





