विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती की संरचना स्वयं ग्रंथ में और धर्म सिंधु में वर्णित है:
मूल संरचना
- ▸कुल अध्याय: 13
- ▸कुल श्लोक: 700
- ▸'सप्तशती' नाम: सात सौ (700) श्लोकों के कारण
- ▸स्रोत: मार्कंडेय पुराण के 81 से 93 अध्याय
तीन चरित्र — तीन देवियाँ
प्रथम चरित्र (1 अध्याय)
- ▸देवी: महाकाली
- ▸बीज: ऐं
- ▸असुर: मधु और कैटभ
- ▸कथा: ब्रह्मा ने विष्णु को जगाने के लिए योगनिद्रा (महाकाली) की स्तुति की। विष्णु जागे और मधु-कैटभ का वध किया।
- ▸श्लोक संख्या: लगभग 88
मध्यम चरित्र (3 अध्याय — 2, 3, 4)
- ▸देवी: महालक्ष्मी
- ▸बीज: ह्रीं
- ▸असुर: महिषासुर
- ▸कथा: महिषासुर ने स्वर्ग पर विजय पाई। सभी देवताओं की शक्ति से दुर्गा उत्पन्न हुईं और महिषासुर का वध किया।
- ▸श्लोक संख्या: लगभग 200
उत्तम चरित्र (9 अध्याय — 5 से 13)
- ▸देवी: महासरस्वती
- ▸बीज: क्लीं
- ▸असुर: शुंभ-निशुंभ, चंड-मुंड, रक्तबीज
- ▸कथा: शुंभ-निशुंभ ने देवताओं को हराया। देवी ने काली, कौशिकी आदि रूप धारण करके सभी असुरों का वध किया। रक्तबीज वध का रहस्य।
- ▸श्लोक संख्या: लगभग 430
13वाँ अध्याय — सुरथ-समाधि कथा और फलश्रुति
राजा सुरथ और वैश्य समाधि को देवी ने वरदान दिया। देवी ने स्वयं पाठ का फल बताया।
षडंग — 6 अंग
- 1देव्यथर्वशीर्ष
- 2कवच
- 3अर्गला
- 4कीलक
- 513 अध्याय
- 6उपसंहार श्लोक
विशेष स्तोत्र जो सप्तशती में हैं
- ▸देवी सूक्त (देवी का परिचय)
- ▸महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र (मधुर)
- ▸देवी स्तुति — सर्वभूतस्तुति (11 श्लोक)
- ▸देवी का वरदान — उत्तर चरित्र





