विस्तृत उत्तर
चंडी पाठ' वास्तव में दुर्गा सप्तशती का ही दूसरा नाम है। इसे 'देवी महात्म्य' भी कहते हैं।
चंडी पाठ का अर्थ
- ▸'चंडी' = वह देवी जो चंड-मुंड असुरों का वध करती हैं (सप्तशती के अध्याय 7-8 में वर्णित)
- ▸'चंडी' = प्रचंड शक्ति — तीव्र, प्रबल देवी
- ▸'पाठ' = पाठ/वाचन
चंडी पाठ = दुर्गा सप्तशती
- ▸मार्कंडेय पुराण के अध्याय 81-93
- ▸13 अध्याय, 700 श्लोक
- ▸इसीलिए 'सप्तशती' = 700 श्लोकों का ग्रंथ
तीन प्रकार का चंडी पाठ
- 1सरल पाठ — सप्तशती के 13 अध्याय एक बार
- 2त्रिकाल चंडी — एक दिन में तीन बार पूर्ण पाठ
- 3एकादश चंडी — 11 बार पूर्ण पाठ (विशेष अनुष्ठान)
- 4शतचंडी — 100 बार पाठ (महायज्ञ)
- 5सहस्र चंडी — 1000 बार पाठ (अत्यंत दुर्लभ)
चंडी पाठ और सप्तशती में अंतर
कोई अंतर नहीं — यह एक ही ग्रंथ के दो नाम हैं। केवल क्षेत्रीय भाषा का अंतर है:
- ▸उत्तर भारत में: 'दुर्गा सप्तशती' या 'चंडी पाठ'
- ▸दक्षिण भारत में: 'देवी महात्म्यम्'
- ▸बंगाल में: 'चंडी' या 'श्रीश्रीचंडी'
चंडी पाठ का विशेष महत्व
चंडी पाठ शीघ्र फलदायी माना जाता है। देवी भागवत के अनुसार — जो व्यक्ति शुद्ध भाव से चंडी का पाठ करता है, देवी उसकी तत्काल रक्षा करती हैं।





