विस्तृत उत्तर
चंडी पाठ का परिचय और महत्व मार्कंडेय पुराण और धर्म सिंधु में वर्णित है:
चंडी पाठ क्या है
चंडी' = दुर्गा सप्तशती का ही दूसरा नाम है। यह तीन नाम एक ही ग्रंथ के हैं:
- 1दुर्गा सप्तशती = 700 श्लोकों वाली दुर्गा की स्तुति
- 2चंडी पाठ = चंडी (दुर्गा) का पाठ
- 3देवी महात्म्य = देवी की महिमा का ग्रंथ
चंडी नाम का कारण
मार्कंडेय पुराण में 'चंड' और 'मुंड' नामक असुरों का वध देवी ने किया — इससे देवी 'चामुंडा' और 'चंडी' कहलाईं।
चंडी पाठ और सप्तशती में अंतर
व्यावहारिक रूप से दोनों एक ही हैं:
- ▸चंडी पाठ = 13 अध्यायों का पूर्ण पाठ
- ▸कभी-कभी 'चंडी पाठ' में केवल चंडी के स्तोत्र (देवी सूक्त, अर्गला, आदि) का पाठ भी किया जाता है
'सप्तशती यज्ञ' और 'चंडी यज्ञ'
जब सप्तशती पाठ के साथ हवन किया जाए, तो उसे 'चंडी यज्ञ' या 'सप्तशती यज्ञ' कहते हैं। यह बड़ा अनुष्ठान है जिसमें:
- ▸9 पाठ (नव चंडी)
- ▸11 पाठ (एकादश चंडी)
- ▸100 पाठ (शत चंडी)
चंडी पाठ का समय
- ▸नवरात्रि — सर्वोत्तम
- ▸प्रत्येक अष्टमी
- ▸विशेष संकट में
- ▸किसी बड़े अनुष्ठान के अवसर पर
चंडी पाठ का फल
मार्कंडेय पुराण में देवी कहती हैं — 'इदं सप्तशतीस्तोत्रं श्रवणाच्चैव कीर्तनात्। पापान्नाशयते सद्यः शत्रून्नाशयते महान्।' — यह सप्तशती स्तोत्र के श्रवण और कीर्तन से पाप और शत्रु का नाश होता है।





