विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती का पाठ मार्कंडेय पुराण के 81वें से 93वें अध्याय का संकलन है। इसे 'चंडी पाठ' और 'देवी महात्म्य' भी कहते हैं। पाठ की शास्त्रोक्त विधि इस प्रकार है:
पूर्व तैयारी
- 1स्नान करके स्वच्छ लाल या पीत वस्त्र धारण करें
- 2पूजा स्थान पर दुर्गा जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
- 3घी या तिल के तेल का दीप जलाएं
- 4लाल फूल, लाल चंदन, अक्षत, धूप तैयार रखें
पाठ की क्रमिक विधि
1कवच पाठ (सर्वप्रथम)
पाठ से पूर्व 'देवी कवच' का पाठ करें — यह साधक की रक्षा करता है।
2अर्गला स्तोत्र
कवच के बाद अर्गला स्तोत्र का पाठ करें — 'जय त्वं देवि चामुंडे जय भूतार्तिहारिणि...' — यह पाठ का द्वार खोलता है।
3कीलक स्तोत्र
कवच और अर्गला के बाद कीलक पाठ करें — यह मंत्र शक्ति को 'खोलता' है।
4नवार्ण मंत्र जप
> ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे
कम से कम 9 बार जप करें।
5सप्तशती पाठ (तीन चरित्र)
- ▸प्रथम चरित्र (अध्याय 1) — महाकाली का प्रसंग, मधु-कैटभ वध
- ▸मध्यम चरित्र (अध्याय 2-4) — महालक्ष्मी का प्रसंग, महिषासुर वध
- ▸उत्तम चरित्र (अध्याय 5-13) — महासरस्वती का प्रसंग, शुंभ-निशुंभ वध
6देवी सूक्त पाठ
पाठ के अंत में 'या देवी सर्वभूतेषु...' का पाठ करें।
7क्षमा प्रार्थना
अंत में त्रुटियों की क्षमा मांगें — 'अपराध सहस्राणि क्रियंते अहर्निशम्...'।
नवरात्रि में पाठ का क्रम
- ▸नवरात्रि के 9 दिनों में एक पूर्ण पाठ
- ▸या प्रतिदिन एक-एक अध्याय
- ▸या तीन दिन में एक-एक चरित्र
पाठ का समय: प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) या सायंकाल — दोनों शुभ हैं।





