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विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ/देवी महात्म्य) मार्कण्डेय पुराण का अंश — 700 श्लोक, 13 अध्याय, देवी के 3 रूप (महाकाली/महालक्ष्मी/महासरस्वती):
कब करें
- ▸नवरात्रि (शारदीय/चैत्र/गुप्त) — सर्वोत्तम।
- ▸मंगलवार/शुक्रवार — देवी के दिन।
- ▸अष्टमी/नवमी तिथि — विशेष।
- ▸किसी भी संकट काल में।
पाठ विधि
- 1गणेश पूजन सर्वप्रथम।
- 2कलश स्थापना (नवरात्रि में), नवग्रह पूजन।
- 3लाल कपड़े पर पुस्तक रखें।
- 4शापोद्धार अनिवार्य — सप्तशती के मंत्र ब्रह्मा/वशिष्ठ/विश्वामित्र द्वारा शापित। शापोद्धार बिना सही फल नहीं।
- 5क्रम: कवच (बीज/रक्षा) → अर्गला (शक्ति/बाधा हटाना) → कीलक (फल प्राप्ति) → 13 अध्याय → तीन रहस्य।
- 6पूर्वाभिमुख बैठें।
- 7शुद्ध उच्चारण, एकाग्रता।
- 8मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन वर्जित। ब्रह्मचर्य।
- 9पाठ के बाद क्षमा प्रार्थना अवश्य।
- 10अंत में आरती + प्रसाद।
संक्षिप्त विकल्प: समय न हो तो केवल सिद्ध कुंजिका स्तोत्र — 'कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्' (कवच/अर्गला/कीलक की आवश्यकता नहीं)।
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