विस्तृत उत्तर
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में संक्रमण का द्योतक है, जो खगोलीय दृष्टि से उत्तरायण के आरंभ को परिभाषित करता है।
वैदिक और पौराणिक वाङ्मय में उत्तरायण को 'देवयान' (देवताओं का दिन) की संज्ञा दी गई है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरता की ओर तथा नकारात्मकता से सकारात्मक ऊर्जा की ओर ऊर्ध्वगमन का प्रतीक है।
विभिन्न धर्मशास्त्रीय ग्रंथों, विशेषकर 'धर्मसिंधु', 'निर्णयसिंधु', 'मत्स्य पुराण', 'भविष्य पुराण' और 'स्कंद पुराण' के गहन अनुशीलन से यह तथ्य निर्विवाद रूप से स्थापित होता है कि मकर संक्रांति एक अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा माना गया है।
सूर्य का यह राशि परिवर्तन प्राणिमात्र के जीवन में नव-चेतना, स्फूर्ति और स्वास्थ्य का संचार करता है।
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