महाभारतभीष्म पितामह की मृत्यु क्यों नहीं हुई बाणों पर?भीष्म पितामह को उनके पिता शांतनु से इच्छामृत्यु का वरदान था इसलिए बाणों की शैया पर 58 दिन पड़े रहने पर भी वे जीवित रहे। वे उत्तरायण की प्रतीक्षा में थे क्योंकि शास्त्रों में उत्तरायण में मृत्यु को मोक्षदायी माना जाता है। मकर संक्रांति पर उन्होंने स्वेच्छा से प्राण त्यागे।#भीष्म पितामह#इच्छामृत्यु#बाणों की शैया
लोकदेवयान मार्ग में कौन-कौन से लोक पड़ते हैं?देवयान मार्ग में — अर्चिस, दिन, शुक्ल पक्ष, उत्तरायण, देवलोक, वायु, वरुण, इंद्र, प्रजापति, सूर्य, विद्युत — और फिर अमानव पुरुष सत्यलोक ले जाता है।
तर्पणमकर संक्रांति पर पितरों का तर्पण क्यों करते हैं?दक्षिणायन = पितृयान, उत्तरायण = देवयान। मकर संक्रांति = दक्षिणायन की समाप्ति + पितरों की विदाई का दिन → तर्पण अनिवार्य। विष्णु पुराण और मत्स्य पुराण: इस दिन पितर श्राद्ध-तर्पण करने वाला अनंत फल का भागी।#पितर तर्पण#उत्तरायण#पितृयान देवयान
मकर संक्रांति परिचयउत्तरायण क्या होता है — देवयान क्यों कहते हैं?उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर। दक्षिणायन = 'पितृयान'। मकर संक्रांति = उत्तरायण का प्रथम दिन — पितरों की विदाई और देवताओं के स्वागत का पर्व।#उत्तरायण#देवयान#दक्षिणायन
मकर संक्रांति परिचयमकर संक्रांति क्यों मनाते हैं?मकर संक्रांति = सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण। उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता की ओर। धर्मसिंधु, मत्स्य पुराण आदि: इस दिन स्नान, दान, जप और तप का फल अनंत कोटि गुणा।#मकर संक्रांति#सूर्य संक्रमण#उत्तरायण
नाम का कारणइस दिन को 'रथ सप्तमी' क्यों कहा जाता है?इस दिन भगवान सूर्य अपने सात घोड़ों वाले दिव्य रथ पर सवार होकर नई ऊर्जा के साथ उत्तर दिशा (उत्तरायण) की ओर बढ़ते हैं, इसलिए इसे रथ सप्तमी कहते हैं।#रथ संचालन#उत्तरायण#सप्ताश्व
व्रत नियम और संकल्पमंगलवार का व्रत कब से शुरू करना चाहिए?मंगलवार का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से शुरू करना चाहिए। अगर सूर्य उत्तरायण में हो या ज्येष्ठ मास का 'बड़ा मंगल' हो, तो यह और भी उत्तम माना जाता है।#व्रत प्रारंभ#शुभ मुहूर्त#ज्येष्ठ मास
त्योहार पूजामकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का क्या धार्मिक कारण है?पतंग: सूर्य स्वागत (उत्तरायण), ऊर्ध्वगामी=शुभता (गीता 8.24 — देवयान), सूर्य स्नान (Vitamin D — सर्दी मुक्ति), ऋतु उत्सव (शीत विदाई), सामुदायिक मेलजोल। चीनी मांजा=पक्षी हत्या — सूती डोर प्रयोग।#मकर संक्रांति#पतंग#सूर्य
त्योहार पूजामकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का क्या महत्व है?तिल-गुड़ महत्व: धार्मिक — तिल = शनि प्रिय (मकर स्वामी), विष्णु वास, 6 प्रकार प्रयोग (स्नान-दान-हवन-भोजन-तर्पण-उबटन)। गुड़ = मिठास-सम्बंधों का प्रतीक। आयुर्वेदिक — तिल उष्ण (सर्दी में गर्मी), गुड़ ऊर्जा-लौह स्रोत। दान सर्वाधिक पुण्यदायी।#मकर संक्रांति#तिल गुड़#उत्तरायण