विस्तृत उत्तर
मकर संक्रांति के बाद, माघ शुक्ल सप्तमी वह समय है जब भगवान सूर्य अपनी पूर्ण गति और प्रखर ऊर्जा के साथ उत्तरी गोलार्ध (उत्तरायण) की ओर पूरी तरह से मुड़ जाते हैं। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, इस दिन सूर्य के दिव्य 'सप्ताश्व रथ' (सात घोड़ों वाले रथ) का संचलन उत्तर-पूर्व दिशा में एक नई ऊर्जा के साथ आरंभ होता है। इसी अयन-गतिशीलता और रथ-परिवर्तन के कारण इसे 'रथ सप्तमी' कहा जाता है। इसे वसंत के आगमन और कृषि-चक्र के नए साल के रूप में भी देखा जाता है।





