विस्तृत उत्तर
पौराणिक आख्यानों, विशेषकर 'भविष्य पुराण' और 'साम्ब पुराण' के सूर्य-माहात्म्य प्रसंगों के अनुसार, माघ शुक्ल सप्तमी के पावन दिन ही महर्षि कश्यप और माता अदिति के अंश से भगवान सूर्यदेव (आदित्य) का प्रत्यक्ष प्राकट्य (जन्म) हुआ था। इसी दिन भगवान सूर्यदेव अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पहली बार संपूर्ण जगत को अपने तेज से प्रकाशित करने के लिए प्रकट हुए थे, इसलिए इसे भगवान सूर्य के जन्मोत्सव अर्थात् 'सूर्य-जयंती' के रूप में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है।




