विस्तृत उत्तर
सूर्य देव महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं तथा समस्त ग्रहों के अधिपति हैं।
वे जगत की आत्मा और प्राण-ऊर्जा के स्रोत हैं।
सूर्य देव कौन हैं को संदर्भ सहित समझें
सूर्य देव कौन हैं का सबसे सीधा सार यह है: सूर्य देव महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं — वे समस्त ग्रहों के अधिपति, जगत की आत्मा और प्राण-ऊर्जा के स्रोत हैं।
नवग्रहों का देव स्वरूप जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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चंद्र देव की उत्पत्ति कैसे हुई?
पुरुष सूक्त: चंद्र विराट पुरुष के मन से उत्पन्न (चन्द्रमा मनसो जातः)। समुद्र मंथन से भी प्राकट्य हुआ — क्षीरसागर पुत्र कहलाए। भगवान शिव ने मस्तक पर धारण कर मान बढ़ाया।
भुवर्लोक को नाभि स्थान क्यों कहा गया है?
भुवर्लोक को नाभि इसलिए कहते हैं क्योंकि जैसे नाभि शरीर में प्राण ऊर्जा का केंद्र है वैसे ही भुवर्लोक ब्रह्मांड की मध्यवर्ती प्राण-ऊर्जा का केंद्र है।
प्राण ऊर्जा क्या होती है?
प्राण ऊर्जा जीवन, गति और चेतना को सक्रिय करने वाली सूक्ष्म शक्ति है।
विनता और कद्रू कौन थीं?
विनता और कद्रू महर्षि कश्यप की दो पत्नियाँ और बहनें थीं। विनता पक्षियों की माता थीं और कद्रू एक हजार नागों की माता थीं।
इसे 'सूर्य-जयंती' क्यों कहा जाता है?
भविष्य पुराण के अनुसार इसी दिन महर्षि कश्यप और माता अदिति के घर भगवान सूर्य देव का प्राकट्य (जन्म) हुआ था, इसलिए इसे सूर्य का जन्मदिन (सूर्य-जयंती) भी कहते हैं।
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