विस्तृत उत्तर
सूर्य देव को अर्घ्य देने की एक निश्चित और फलदायी विधि शास्त्रों में बताई गई है। सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तत्पश्चात ताँबे के लोटे में शुद्ध जल भरें — शास्त्रों में सूर्य को जल अर्पण के लिए ताँबे का पात्र ही निर्धारित है क्योंकि ताँबा सूर्य की ऊर्जा का वाहक माना जाता है। जल में रोली (लाल चंदन), अक्षत (साबुत चावल), लाल पुष्प और कुछ बूँदें गंगाजल मिलाएँ। पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। दोनों हाथों को सिर से लगभग आठ इंच ऊपर उठाकर लोटे को झुकाएँ ताकि जल की एक धारा नीचे गिरे और सूर्य की किरणें उस जल धारा को पार करके आपके शरीर पर पड़ें। जल आपके पैरों पर न गिरे इसका ध्यान रखें। अर्घ्य देते समय मन में 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें। जो जल भूमि पर गिरे उसे माथे पर लगाएँ। सूर्योदय के एक घंटे के भीतर अर्घ्य देना सर्वोत्तम है। रविवार का दिन सूर्यदेव को विशेष प्रिय है। नियमित अर्घ्य से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में ऊर्जा, यश और आरोग्य की प्राप्ति होती है।





