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सूर्य अर्घ्य से जुड़े सभी प्रश्न(9)

सूर्य अर्घ्य पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 9 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पूजा विधि एवं कर्मकांड

सूर्य अर्घ्य मंत्र क्या है?

सूर्य अर्घ्य का मुख्य मंत्र है — 'ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकंपये माम् भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर:॥' बीज मंत्र 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' और सरल मंत्र 'ॐ घृणिं सूर्य आदित्य:' भी प्रचलित हैं। प्रातः उगते सूर्य को तांबे के पात्र से अर्घ्य देते समय इनका उच्चारण किया जाता है।

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सूर्य अर्घ्य

अर्घ्य के बाद प्रदक्षिणा और प्रणाम कैसे करते हैं?

अर्घ्य के बाद: अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करें। फिर सूर्य देव को साष्टांग (8 अंगों से) या पंचांग (5 अंगों से) प्रणाम करें।

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दैनिक पूजा में धातु

तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य देने से क्या होता है?

तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य, चंद्र और मंगल की स्थिति मजबूत होती है और घर से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

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दैनिक आचरण एवं संस्कार

ताँबे के लोटे से जल चढ़ाने का महत्व

ताँबे को सूर्य की धातु माना गया है। शास्त्र में सूर्य अर्घ्य के लिए ताँबे का पात्र अनिवार्य है। आयुर्वेद में भी ताँबे के जल के अनेक स्वास्थ्य लाभ बताए गए हैं — पाचन सुधार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और रक्त शुद्धि।

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दैनिक आचरण एवं संस्कार

सूर्य को अर्घ्य देने का सही तरीका

स्नान के बाद ताँबे के लोटे में जल, रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर, पूर्व दिशा में मुख करके हाथ ऊपर उठाकर जल की धारा गिराएँ। 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः' मंत्र जपें। जल पैर पर न पड़े।

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त्योहार पूजा

छठ पूजा की विधि क्या है और सूर्य को अर्घ्य कैसे दें?

छठ पूजा 4 दिन: नहाय-खाय → खरना (निर्जला, शाम खीर-प्रसाद) → षष्ठी संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को, कमर तक जल में) → सप्तमी प्रातः अर्घ्य (उगते सूर्य)। बाँस सूप में ठेकुआ-फल-गन्ना। 'ॐ सूर्याय नमः।' कठोरतम व्रत।

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दैनिक कर्म

सूर्य को जल देने की विधि और मंत्र क्या है

तांबे के लोटे में जल + लाल फूल + लाल चन्दन + कुमकुम + अक्षत। सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में मुख कर 'ॐ सूर्याय नमः' या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' बोलते हुए जल अर्पित करें। गायत्री मंत्र भी जप सकते हैं। नियमित समय पर करें, बासी जल न चढ़ाएँ।

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दैनिक कर्म

सूर्य को जल देते समय किस दिशा में खड़े हों

सूर्य को जल देते समय मुख सदैव पूर्व दिशा (सूर्योदय की दिशा) की ओर रखें। खुले स्थान पर नंगे पैर खड़े होकर, दोनों हाथों से तांबे का लोटा उठाकर धारा से जल अर्पित करें। जल की धारा से सूर्य किरणें देखना शुभ है। पूर्व दिशा देवताओं की दिशा मानी गई है।

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दैनिक कर्म

सूर्य को जल देने की विधि — मंत्र?

सूर्योदय, तांबा लोटा(जल+रोली+फूल), पूर्व मुख, खड़े, 'ॐ सूर्याय नमः' 11 बार, धीरे जल गिराएँ(इंद्रधनुष)। लाभ: स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, विटामिन D।

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