विस्तृत उत्तर
सूर्य देव को अर्घ्य देने में ताँबे के लोटे का विशेष महत्व है — यह धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से सिद्ध है। धार्मिक दृष्टि से ताँबे को सूर्य की धातु माना गया है। सूर्य देव के साथ ताँबे का सहज संबंध है। शास्त्रों में स्पष्ट निर्देश है कि सूर्य को जल अर्पण हमेशा ताँबे के पात्र से ही करना चाहिए। ताँबे के पात्र में रखा जल सूर्य की ऊर्जा को संग्रहीत करने में अधिक प्रभावशाली माना जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से — ताँबे के बर्तन में जल रखने से उसमें ताँबे के सूक्ष्म कण घुलते हैं जो अनेक रोगों में लाभदायक हैं। ताँबे का जल पीने से पाचन शक्ति बेहतर होती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और रक्त शुद्धि होती है। वैज्ञानिक शोधों ने भी पुष्टि की है कि ताँबे में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इसके अलावा जब सूर्योदय के समय ताँबे के लोटे से जल की धारा गिराई जाती है और सूर्य की किरणें उससे गुजरकर आँखों तक पहुँचती हैं, तो इसका नेत्रों पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। यह ज्योतिषीय मान्यता भी है कि जिनकी जन्मकुंडली में सूर्य कमजोर हो, उन्हें ताँबे के लोटे से नियमित जल चढ़ाना विशेष लाभकारी होता है।





