विस्तृत उत्तर
सूर्य को अर्घ्य देना वैदिक काल से चली आ रही प्राचीन उपासना परम्परा है। सूर्य नवग्रहों में सर्वश्रेष्ठ, समस्त जीवन के आधार और आत्मबल के कारक माने जाते हैं। प्रातःकाल उगते सूर्य को तांबे के पात्र में जल, लाल फूल, अक्षत और रोली मिलाकर अर्घ्य देने का विधान है।
सूर्य अर्घ्य के प्रमुख मंत्र:
१. सरल और सर्वाधिक प्रचलित मंत्र:
ॐ घृणिं सूर्य्य आदित्य:
अर्थ: हे तेजस्वी सूर्य, हे आदित्य — आपको नमस्कार।
२. अर्घ्य अर्पण के समय:
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकंपये माम् भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर:॥
अर्थ: हे सहस्र किरणों वाले, तेज के भण्डार, जगत के स्वामी सूर्य! आप पधारें, मेरी भक्तिपूर्वक दी गई यह अर्घ्य स्वीकार करें, हे दिवाकर!
३. सूर्य बीज मंत्र:
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
यह सूर्य का तांत्रिक बीज मंत्र है जिसे अर्घ्य देते समय या 108 बार जाप के लिए उपयोग किया जाता है।
४. कामना-पूर्ति मंत्र:
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा।
अर्घ्य सूर्योदय से पहले स्नान करके, उत्तर या पूर्वाभिमुख होकर, खड़े होकर देना सबसे शुभ माना गया है।





