विस्तृत उत्तर
पूजा में फल अर्पित करने के कुछ शास्त्रीय नियम हैं जो पूजा को सार्थक और शास्त्रसम्मत बनाते हैं।
विषम संख्या — फल हमेशा विषम संख्या (1, 3, 5) में अर्पित करें। यह शुभता का प्रतीक है।
ऋतु-फल — शास्त्रों में 'ऋतुफल' अर्थात उस मौसम में उपलब्ध फल अर्पित करने को सर्वोत्तम माना गया है। मौसमी फल सबसे अधिक प्राकृतिक और शुद्ध होते हैं।
देवता के अनुसार फल — भगवान विष्णु और राम को केला और पेड़े का संयोग प्रिय है। भगवान शिव को बेल-फल और बेर प्रिय हैं। देवी को नारियल, श्रीफल विशेष प्रिय है। भगवान गणेश को मोदक के साथ-साथ ऋतुफल प्रिय हैं।
फल की शुद्धता — कटे हुए, सड़े हुए, या अधपके फल देवता को नहीं चढ़ाने चाहिए। फल को स्वयं हाथ से काटकर देवता को न दें — साबुत फल ही चढ़ाएँ।
नारियल विशेष — नारियल सबसे पवित्र फल माना जाता है क्योंकि यह त्रिनेत्र (शिव के तीन नेत्र) का प्रतीक है। कलश स्थापना में, यज्ञ में और देवता को नारियल-फोड़ने की परंपरा इसीलिए है।
फल अर्पण का मंत्र — 'इदं फलं मया देव स्थापितं पुरतस्तव। तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि॥'





