विस्तृत उत्तर
पान (ताम्बूल) हिंदू पूजा में एक अनिवार्य सामग्री है। षोडशोपचार पूजा में ताम्बूल समर्पण चौदहवाँ उपचार है और शास्त्रों के अनुसार इसके समर्पण से भोगों की उपलब्धि होती है।
पान की पवित्रता के संबंध में मान्यता है कि पान के पत्ते में विभिन्न देवी-देवताओं का वास होता है — पत्ते के ऊपरी भाग में इन्द्रदेव, मध्य भाग में माँ सरस्वती, निचले भाग में माँ लक्ष्मी और अंदर के भाग में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। यही कारण है कि पान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय देवताओं ने पान के पत्ते का उपयोग किया था। तब से यह दैवीय परंपरा का हिस्सा बन गया।
व्यावहारिक पूजा में पान के पत्ते पर सुपारी, लौंग, इलायची और दक्षिणा रखकर ताम्बूल के रूप में भगवान को समर्पित किया जाता है। इसके लिए मंत्र है — 'ॐ लवंगैलादिसंयुक्तं ताम्बूलं दक्षिणां तथा, पत्रपुष्पस्वरूपां हि गृहाणानुगृहाण माम्।'
मान्यता है कि भगवान को पान का बीड़ा अर्पित करने के बाद भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मुश्किलों का बीड़ा स्वयं उठाते हैं।





