विस्तृत उत्तर
ताम्बूल षोडशोपचार पूजा का चौदहवाँ उपचार है जो नैवेद्य के बाद अर्पित किया जाता है। शास्त्रों में ताम्बूल समर्पण से 'भोगों की उपलब्धि' होने का फल बताया गया है।
ताम्बूल की सामग्री — पान के पत्ते पर गोल सुपारी (पूजा वाली), लौंग, इलायची और दक्षिणा रखकर यह उपचार सम्पन्न किया जाता है।
ताम्बूल अर्पण का मंत्र:
ॐ लवंगैलादि-संयुक्तं ताम्बूलं दक्षिणां तथा।
पत्रपुष्पस्वरूपां हि गृहाणानुगृहाण माम्॥'
इसका अर्थ है — हे भगवान, लौंग और इलायची से युक्त यह ताम्बूल और दक्षिणा ग्रहण करें और मुझ पर अनुग्रह करें।
षोडशोपचार में ताम्बूल की क्रम संख्या देखें — 'श्री [देवता] नमः ताम्बूलपुंगीफलानि समर्पयामि' — यहाँ 'पुंगी फल' का अर्थ सुपारी है।
ताम्बूल का आध्यात्मिक भाव — पान और सुपारी पवित्रता और मंगलता का प्रतीक है। इसे भगवान को अर्पित करना उसी भाव से है जैसे किसी सम्मानित अतिथि को भोजन के बाद मुखवास दिया जाता है। यह अतिथि-सत्कार की श्रेष्ठ परंपरा का पूजा में विस्तार है।





