विस्तृत उत्तर
रोली तिलक हिंदू पूजा-परंपरा में सर्वाधिक प्रचलित तिलकों में से एक है। रोली वास्तव में केसर और हल्दी जैसे पदार्थों से बना एक लाल-नारंगी रंग का पाउडर है जो शुभ और मांगलिक कार्यों में उपयोगी है।
रोली तिलक लगाने के नियम इस प्रकार हैं:
रोली तिलक हमेशा दाहिने हाथ की अनामिका अंगुली से लगाना चाहिए। तर्जनी (index finger) से तिलक लगाना शास्त्रों में निषेध बताया गया है।
माथे के मध्य आज्ञाचक्र पर — दोनों भौहों के बीच — लगाएँ। तिलक माथे पर लगाने से पहले भगवान का नाम स्मरण करें।
पूजा से पहले देवता को भी रोली से तिलक अर्पित करें। मंगलवार को देवी दुर्गा को रोली का तिलक विशेष रूप से प्रिय है।
विवाह, यज्ञोपवीत, गृहप्रवेश और किसी भी शुभ कार्य में स्वागत के लिए रोली तिलक का विधान है।
रोली तिलक के साथ अक्षत (चावल) चिपकाने से यह और अधिक शुभ और पूर्ण हो जाता है।
कुछ नियम — रोली को कभी भी पैर की ओर, जमीन पर, या अपवित्र स्थान पर नहीं रखना चाहिए। बचा हुआ रोली का तिलक पानी में प्रवाहित करें या किसी पवित्र स्थान पर रखें।





