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पूजा विधि एवं कर्मकांड⏱ 2 मिनट पठन

पूजा में इलायची रखने का महत्व?

इलायची षोडशोपचार के ताम्बूल उपचार का अनिवार्य अंग है — 'लवंगैलादि-संयुक्तं ताम्बूलम्' में 'एला' का अर्थ इलायची ही है।

संक्षिप्त उत्तर

इलायची षोडशोपचार के ताम्बूल उपचार का अनिवार्य अंग है — 'लवंगैलादि-संयुक्तं ताम्बूलम्' में 'एला' का अर्थ इलायची ही है। इसकी श्रेष्ठ सुगंध देवता को प्रसन्न करती है और लौंग के साथ इसका अर्पण शिव-शक्ति के संयोग का प्रतीक है।

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विस्तृत उत्तर

इलायची पूजा सामग्री का एक महत्वपूर्ण अंग है जो ताम्बूल उपचार में सम्मिलित की जाती है। षोडशोपचार में जो ताम्बूल (पान-बीड़ा) भगवान को समर्पित किया जाता है, उसमें लौंग और इलायची का उल्लेख विशेष रूप से आता है — संस्कृत में इसका उल्लेख 'लवंगैलादि-संयुक्तं ताम्बूलम्' के रूप में मिलता है जिसका अर्थ है लौंग और इलायची (एला) से युक्त पान।

इलायची की सुगंध अत्यंत सुखद और मन को प्रसन्न करने वाली होती है। देवता को ऐसी वस्तुएँ अर्पित की जाती हैं जो सुगंध और सौंदर्य में श्रेष्ठ हों। इलायची उस श्रेणी में सर्वोच्च स्थान पर है।

कुछ परंपराओं में इलायची को शक्ति (देवी पार्वती) का प्रतीक माना जाता है और इस दृष्टि से लौंग-इलायची का एक साथ अर्पण शिव-शक्ति के संयोग का प्रतीक बन जाता है।

आयुर्वेद में इलायची को मुखशुद्धि और शरीर-शोधन के लिए उत्तम माना गया है। पूजा में इसका उपयोग इस भाव से भी है कि देवता को जो भी अर्पित किया जाए वह शुद्ध, सुगंधित और सर्वोत्तम हो।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

पूजा में इलायची रखने का महत्व को संदर्भ सहित समझें

पूजा में इलायची रखने का महत्व का सबसे सीधा सार यह है: इलायची षोडशोपचार के ताम्बूल उपचार का अनिवार्य अंग है — 'लवंगैलादि-संयुक्तं ताम्बूलम्' में 'एला' का अर्थ इलायची ही है। इसकी श्रेष्ठ सुगंध देवता को प्रसन्न करती है और...

पूजा विधि एवं कर्मकांड जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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