विस्तृत उत्तर
लौंग पूजा की एक महत्वपूर्ण सामग्री है जो ताम्बूल (पान के बीड़े) के साथ भगवान को अर्पित की जाती है। षोडशोपचार पूजा में ताम्बूल में लौंग और इलायची मिलाकर अर्पित करने का विशेष विधान है।
लौंग का शास्त्रीय और तांत्रिक महत्व — कुछ परंपराओं में लौंग को भगवान शिव की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसकी तीव्र सुगंध और प्राकृतिक गुण इसे पवित्र और शुद्धिकारक बनाते हैं। लौंग जलाने और अर्पित करने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
हनुमानजी को पान के बीड़े में लौंग और इलायची डालकर अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। जब भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए हनुमानजी को पान का बीड़ा चढ़ाते हैं तो उसमें लौंग और इलायची शामिल की जाती है।
व्यावहारिक पूजा में पान के पत्ते पर सुपारी, लौंग और इलायची रखकर देवता को अर्पित किया जाता है। लौंग का पौधा एकदम सीधा खड़ा रहता है — इसे समर्पण और विनम्रता का प्रतीक भी माना जाता है।
हवन में भी लौंग की आहुति दी जाती है जिससे वातावरण सुगंधित और शुद्ध होता है।





