विस्तृत उत्तर
अक्षत (पूरे और अखंडित चावल के दाने) तिलक के साथ लगाना पूजा की पूर्णता का प्रतीक है। 'अक्षत' शब्द का अर्थ है 'जो खंडित न हो' — इसलिए टूटे हुए चावल नहीं लगाए जाते।
अक्षत क्यों लगाते हैं — हिंदू पूजा में अक्षत समृद्धि, पूर्णता और शुभता का प्रतीक है। तिलक के ऊपर अक्षत चिपकाने से वह तिलक पूर्ण और फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में अक्षत को विष्णु का प्रिय और ऐश्वर्य का प्रतीक कहा गया है।
अक्षत चिपकाने की विधि — पूजा से पहले कच्चे (बिना पकाए) चावल लें। इन्हें थोड़ी सी हल्दी में मिलाकर पीला कर सकते हैं — यह और अधिक शुभ होता है। देवता को तिलक लगाने के बाद उनके ललाट पर 2 से 5 अक्षत दाने धीरे से रखें या चिपकाएँ। जब तक तिलक गीला हो, अक्षत स्वाभाविक रूप से चिपक जाते हैं।
स्वयं को तिलक लगाने के बाद — माथे पर तिलक लगाने के तुरंत बाद, जब तिलक अभी गीला हो, कुछ अक्षत दाने हल्के से माथे पर रख दें — वे चिपक जाएँगे।
एक नियम — अक्षत हमेशा पूरे, साफ और बिना टूटे होने चाहिए। खंडित, पुराने या काले पड़े चावल न लगाएँ। इसी कारण इन्हें अक्षत (अखंडित) कहते हैं।





