विस्तृत उत्तर
पूजा में फल, दीपक की बत्तियाँ, और कुछ अन्य सामग्री विषम संख्या में (1, 3, 5, 7) रखने का विधान शास्त्रों में है। इसके पीछे धार्मिक और प्रतीकात्मक कारण हैं।
शास्त्रीय कारण — विषम संख्या को हिंदू दर्शन में 'अपूर्ण' या 'खुली' संख्या माना जाता है। सम संख्या पूर्णता और बंदता का प्रतीक है — जैसे कोई वस्तु बंद हो। विषम संख्या में भाव यह है कि यह क्रम अभी पूरा नहीं हुआ — एक और संख्या की गुंजाइश है। इस प्रकार भगवान को यह संकेत दिया जाता है कि भक्त की इच्छाएँ और भक्ति अभी अधूरी है, वह पूर्ण आशीर्वाद की प्रतीक्षा में है।
त्रिमूर्ति का प्रतीक — तीन की संख्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक के रूप में विशेष रूप से पवित्र है। पाँच पंचतत्वों का प्रतीक है, और सात सात लोकों का।
आरती में भी विषम संख्या की बत्तियाँ (1, 3, 5, 7) जलाने का विधान है। एकल ज्योत ब्रह्म की एकता का, तीन त्रिमूर्ति का, पाँच पंचदेव का प्रतीक है।
प्रायोगिक दृष्टि से भी विषम संख्या का फल अर्पित करने से एक फल हमेशा मध्य में रहता है जो केंद्रीय महत्व का प्रतीक बनता है।





