विस्तृत उत्तर
जम्बू द्वीप से दोगुना विशाल प्लक्ष द्वीप है जो इक्षु सागर से घिरा है। भागवत पुराण के अनुसार यहाँ हंस, पतंग, ऊर्ध्वायन और सत्यांग नामक चार वर्ण हैं। ये लोग वेदोक्त कर्मकांडों के माध्यम से भगवान सूर्य की उपासना करते हैं। इस द्वीप में उपासना का मूल श्लोक यह है — 'स्वर्ग-द्वारं त्रय्या विद्यया भगवन्तं त्रयीमयं सूर्यम् आत्मानं यजन्ते।' अर्थात वे त्रयी विद्या (वेदों) के द्वारा भगवान के त्रयीमय सूर्य स्वरूप की आराधना करते हैं। यहाँ के सात पर्वत मणिकूट, वज्रकूट, इन्द्रसेन, ज्योतिष्मान, सुपर्ण, हिरण्यष्ठीव और मेघमाल हैं। यहाँ सात पवित्र नदियाँ अरुणा, नृम्णा, आंगिरसी, सावित्री, सुप्तभाता, ऋतम्भरा और सत्यम्भरा प्रवाहित होती हैं। इन नदियों के जल के स्पर्श मात्र से निवासियों के रजोगुण और तमोगुण धुल जाते हैं। इस प्रकार प्लक्ष द्वीप में सूर्य उपासना वेदों की त्रयी विद्या के माध्यम से होती है।
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