विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के द्वितीय स्कन्ध के अनुसार भगवान के विराट स्वरूप में भुवर्लोक नाभि-कमल में स्थित है। देवी भागवत पुराण में भी इस लोक को देवी के ब्रह्मांडीय स्वरूप की नाभि के रूप में वर्णित किया गया है। यह नाभि-स्थिति कोई साधारण भौगोलिक संकेत नहीं है बल्कि यह एक गहरा तात्विक रहस्य है। जिस प्रकार मानव शरीर में नाभि प्राण ऊर्जा का उद्गम और माता के गर्भ से पोषण प्राप्त करने का केंद्र है उसी प्रकार भुवर्लोक ब्रह्मांड की मध्यवर्ती प्राण-ऊर्जा का केंद्र है। यह नाभि की तरह ही ब्रह्मांड में ऊर्जाओं का संचालन और वितरण करता है — यज्ञ की आहुति को ऊपर देवताओं तक और वर्षा को नीचे पृथ्वी तक।
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