विस्तृत उत्तर
सूर्य देव की दो पत्नियाँ पुराणों में वर्णित हैं। पहली और मुख्य पत्नी का नाम संज्ञा है, जो देवशिल्पी विश्वकर्मा की पुत्री थीं। संज्ञा के अन्य नाम राज्ञी, द्यौ और सुरेणु भी मिलते हैं। संज्ञा सूर्य के प्रचंड तेज को सहन नहीं कर पाती थीं, इसलिए उन्होंने अपनी छाया को अपना प्रतिरूप बनाकर सूर्य के पास छोड़ दिया और स्वयं उत्तरकुरु में घोड़ी का रूप धारण कर तपस्या करने चली गईं। वह छायारूपी स्त्री सूर्य की दूसरी पत्नी के रूप में जानी गई, जिसका नाम छाया या स्वर्णा है। संज्ञा से सूर्य के तीन संतानें हुईं — वैवस्वत मनु, यमराज और यमुना। छाया से शनिदेव, सावर्णि मनु और तपती नामक कन्या हुई। जब सूर्य को सत्य का पता चला, तो उन्होंने अपने श्वसुर विश्वकर्मा से अपना तेज कम कराया और संज्ञा के पास लौटे। उसके बाद संज्ञा के बड़वा (घोड़ी) रूप से अश्विनी कुमारों की उत्पत्ति हुई। सूर्य के इस परिवार की विस्तृत कथा भविष्य पुराण, मत्स्य पुराण, मार्कण्डेय पुराण और साम्बपुराण में मिलती है।





