विस्तृत उत्तर
यमराज का वाहन भैंसा (महिष) है। इसीलिए उन्हें 'महिषवाहन' भी कहा जाता है। भैंसे को यम का वाहन चुने जाने के पीछे गहरा प्रतीकात्मक अर्थ है। भैंसा शक्ति, धैर्य, स्थिरता और गंभीरता का प्रतीक है — ठीक वैसे ही जैसे यमराज के न्याय में कोई पक्षपात नहीं होता, वे राजा हो या रंक सबके साथ समान व्यवहार करते हैं। भैंसे का काला रंग अज्ञान, अंधकार और मृत्यु का प्रतीक भी माना गया है। यमराज के हाथ में दंड होता है और वे दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं। उनकी नगरी संयमनीपुरी कहलाती है। मार्कण्डेय पुराण में उनका विस्तृत वर्णन मिलता है। यमराज सूर्य पुत्र हैं और उनकी बहन यमुना नदी हैं। उनके सहयोगी चित्रगुप्त हैं जो प्राणियों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं।



