विस्तृत उत्तर
वायु देव के पुत्रों की संख्या और नामों पर विभिन्न पुराणों में अलग-अलग मत मिलते हैं। सबसे प्रसिद्ध और स्वीकृत मान्यता के अनुसार वायु देव के दो मुख्य पुत्र माने जाते हैं — त्रेतायुग में हनुमान जी और द्वापरयुग में भीमसेन। हनुमान जी माता अंजना और पिता केसरी के पुत्र हैं, किंतु वायु देव की कृपा और उनके माध्यम से शिव के अंश से उनका जन्म हुआ, इसीलिए उन्हें 'पवनपुत्र' कहा जाता है। भीम माता कुंती और वायु देव के वरदान से जन्मे थे। कुछ परंपराओं और पुराणों में मध्वाचार्य (द्वैत वेदांत के संस्थापक) को भी वायु का अवतार माना गया है, जो कलियुग में वेद व्यास की सेवार्थ आए। कुछ ग्रंथों में प्राणदत्त नाम का एक अन्य पुत्र भी उल्लिखित है। भारतकोश के अनुसार वायु देव को भीम का पिता और हनुमान का आध्यात्मिक पिता कहा जाता है। तीनों युगों में वायु के इन पुत्रों ने सृष्टि के कल्याण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।




