विस्तृत उत्तर
हाँ, यमराज और धर्मराज एक ही देवता के दो नाम हैं। यम का अर्थ है नियंत्रण और संयम, जबकि 'धर्मराज' उन्हें इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे धर्मपूर्वक — अर्थात् बिना किसी पक्षपात के — प्राणियों के कर्मों का विचार करके उन्हें स्वर्ग या नरक का निर्णय देते हैं। स्मृतियों में यमराज के चौदह नाम वर्णित हैं — यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैवस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुम्बर, दध्न, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त। इनमें धर्मराज प्रमुख नाम है। यह ध्यान देने योग्य है कि महाभारत में युधिष्ठिर को भी 'धर्मराज' कहा गया क्योंकि वे यमराज के अंश से जन्मे थे। किंतु उस अर्थ में यह युधिष्ठिर की उपाधि थी, न कि यमराज का नाम। यमराज सूर्य पुत्र हैं, दक्षिण दिशा के दिक्पाल हैं, और उनकी नगरी संयमनीपुरी में प्राणियों की मृत्यु के बाद उनके कर्मों का निर्णय होता है।




