विस्तृत उत्तर
यमलोक का मुख्य उद्देश्य जीवों के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना और प्राकृतिक न्याय की स्थापना करना है। यह व्यवस्था जीवात्मा के शुभ-अशुभ कर्मों की प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए परमेश्वर के एक कठोर प्रशासनिक विभाग के रूप में कार्य करती है। यमराज इस विभाग के अधिपति हैं, जो भगवान के विशेष महाजन माने गए हैं। चित्रगुप्त हर जीव का कर्म-वृत्तांत प्रस्तुत करते हैं, श्रवण-श्रवणी कर्मों के गवाह हैं और यमदूत दंडाधिकारियों के रूप में जीवात्मा को यमलोक तक लाते हैं।
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