विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण और पुराणिक वर्णनों में चित्रगुप्त की जिम्मेदारी और उनकी रिपोर्टिंग संरचना स्पष्ट रूप से बताई गई है।
चित्रगुप्त यमराज (धर्मराज) को रिपोर्ट करते हैं। यमराज यमलोक के सर्वोच्च न्यायाधीश हैं। चित्रगुप्त उनके सचिव, लेखाकार और सलाहकार की भूमिका में हैं। 'विधाता लिखता है, चित्रगुप्त बांचता है, यमदूत पकड़कर लाते हैं और यमराज दंड देते हैं' — यह सनातन परंपरा की एक प्रसिद्ध उक्ति है।
चित्रगुप्त की रिपोर्ट के बाद यमराज निर्णय लेते हैं। बिना चित्रगुप्त के लेखे के यमराज न्याय नहीं कर सकते — दोनों का कार्य परस्पर अनिवार्य है।
चित्रगुप्त ने ब्रह्मा जी की आज्ञा से यह कार्य लिया था, परंतु यमलोक में वे यमराज के अधीन कार्य करते हैं। वे स्वयं कोई निर्णय नहीं लेते — केवल तथ्य प्रस्तुत करते हैं। निर्णय यमराज का होता है।
इस प्रकार चित्रगुप्त और यमराज मिलकर कर्म-न्याय की एक पूर्ण और निष्पक्ष व्यवस्था संचालित करते हैं।




