विस्तृत उत्तर
यमराज को मृत्यु के देवता, धर्मराज और पितरों के अधिपति के रूप में मान्यता प्राप्त है। विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार वे सूर्य, यानी विवस्वान, के पुत्र हैं और उन्हें ब्रह्मांड में न्याय और दण्ड-विधान का सर्वोच्च अधिकार प्राप्त है। यमराज का पद कोई साधारण देव-पद नहीं है, अपितु यह ब्रह्मांडीय न्यायपालिका का सर्वोच्च पद है, जहाँ से संपूर्ण सृष्टि के पाप-पुण्य का संतुलन स्थापित किया जाता है। वे भगवान विष्णु के प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं और कर्मों के अनुसार जीवात्मा को न्याय देते हैं।
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