विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि जब कोई अत्यंत पुण्यात्मा, जिसने अन्न, वस्त्र, गौ अथवा विद्या का दान किया हो, यमलोक के समीप पहुँचती है, तो धर्मराज स्वयं अपने आसन से उठकर उस पुण्यात्मा का स्वागत करते हैं और उसे सम्मानपूर्वक अपनी सभा में स्थान देते हैं। जो व्यक्ति धर्म का पालन करते हैं और निष्काम भाव से कर्म करते हैं, वे इस सभा में अत्यंत आदर प्राप्त करते हैं। पुण्यवान आत्मा यमराज की सभा में चारों ओर दिव्य प्रकाश देखती है और वहाँ मुनीश्वर, सिद्ध योगी, गंधर्व, देवता तथा पितृगणों की उपस्थिति में सम्मान पाती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





