विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म में 'धर्मराज' यमराज का ही दूसरा नाम है। 'धर्म + राज' — अर्थात् धर्म और सत्य का राजा। जो प्राणियों के समस्त कर्मों के अनुसार न्याय करे, वही धर्मराज है।
परिचय — यमराज (धर्मराज) भगवान सूर्य और संज्ञा के पुत्र हैं। शनिदेव और यमुना उनके भाई-बहन हैं। उनका वाहन भैंसा है और हाथ में दंड (डंडा) और पाश (रस्सी) है। उनका निवास यमपुरी में है।
स्वरूप — धर्मराज को प्रायः विशाल, भव्य और गंभीर रूप में चित्रित किया जाता है। वे न्याय के देवता हैं — न क्रोधी, न करुणामय। वे केवल कर्म देखते हैं।
कार्य — धर्मराज समस्त प्राणियों की मृत्यु के बाद उनके कर्मों का न्याय करते हैं। चित्रगुप्त के लेखे के आधार पर वे आत्मा को स्वर्ग, नरक, पितृलोक या पुनर्जन्म का निर्णय देते हैं।
महत्व — गरुड़ पुराण में धर्मराज का महत्व इस रूप में बताया गया है कि उनके दरबार में देवता भी बिना उनकी आज्ञा के प्रवेश नहीं कर सकते। उनका न्याय अटल और अंतिम है।




