विस्तृत उत्तर
यमराज का दरबार पापी आत्मा के लिए भय और दंड का स्थान है, परंतु शास्त्रीय वर्णन के अनुसार उनकी सभा स्वयं कोई अंधकारमय या डरावना स्थान नहीं है। यह देवलोक की सभाओं के समान अत्यंत भव्य और विस्तृत है। पुण्यवान आत्मा जब यमलोक पहुँचती है, तो यमराज की सभा में चारों ओर दिव्य प्रकाश देखती है। इस सभा में मुनीश्वर, सिद्ध योगी, गंधर्व, देवता और पितृगण उपस्थित रहते हैं। धर्मराज के सिंहासन पर आसीन होने पर गंधर्व उनका यशोगान करते हैं और अप्सराएँ नृत्य करती हैं। इसलिए यमराज का दरबार कर्म के अनुसार अनुभव होता है—पुण्यात्मा के लिए दिव्य और पापी के लिए भयावह।
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