विस्तृत उत्तर
यमलोक मृत्यु के उपरांत जीवात्मा की गति, कर्म-विपाक और न्याय से जुड़ा एक सुनिश्चित भौगोलिक एवं आध्यात्मिक आयाम है। यह मात्र कोई कल्पित स्थान नहीं है, बल्कि पौराणिक ब्रह्मांड विज्ञान के अंतर्गत वह लोक है जहाँ जीवात्मा अपने कर्मों का फल भोगने हेतु जाती है। यमलोक का मुख्य उद्देश्य जीवों के कर्मों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना और प्राकृतिक न्याय की स्थापना करना है। यह व्यवस्था परमेश्वर के कठोर प्रशासनिक विभाग के रूप में कार्य करती है, जहाँ यमराज अधिपति हैं, चित्रगुप्त कर्मों का लेखा रखते हैं, श्रवण-श्रवणी गुप्तचर के रूप में कर्मों के साक्षी हैं और यमदूत दंडाधिकारियों के रूप में जीवात्मा को मृत्यु के बाद वहाँ लाते हैं।
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