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विस्तृत उत्तर
यमराज की सभा देवलोक की सभाओं के समान अत्यंत भव्य और विस्तृत है। जब धर्मराज अपने सिंहासन पर आसीन होते हैं, तो गंधर्व उनका यशोगान करते हैं और अप्सराएँ नृत्य करती हैं। इस सभा में अनेक मुनीश्वर, सिद्ध योगी, गंधर्व, देवतागण और पितृलोक के अधिपति अग्निष्वात्त आदि पितृगण उपस्थित रहते हैं। पुण्यवान आत्माएँ इस दिव्य वातावरण में सम्मान प्राप्त करती हैं और देवताओं तथा मुनियों के सत्संग का लाभ उठाती हैं।
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