विस्तृत उत्तर
पर्वतास्त्र दिव्यास्त्रों के विशाल भंडार में एक अत्यंत विनाशकारी और भयावह अस्त्र है। 'पर्वत' और 'अस्त्र' के मेल से बना यह नाम 'पर्वतों का हथियार' का अर्थ देता है। यह एक ऐसा विनाशकारी अस्त्र था जो शत्रु की विशाल सेनाओं को एक ही क्षण में कुचलकर उनकी प्रगति को रोकने की क्षमता रखता था। इस अस्त्र के अधिष्ठाता देवता वायु देव हैं। इसके प्रयोग से आकाश से विशाल पर्वत और चट्टानें प्रकट होकर शत्रु सेना पर कहर बनकर टूट पड़ती थीं। महाभारत के भीष्म पर्व और कल्कि पुराण में इसके प्रयोग का वर्णन मिलता है।
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