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विस्तृत उत्तर
यममार्ग का वातावरण अत्यंत भयंकर बताया गया है। यह मार्ग तपते हुए सूर्य की ज्वालाओं से दग्ध है और वहाँ विश्राम के लिए कोई वृक्ष या छाया नहीं है। आत्मा भूख, प्यास और थकान से पीड़ित होकर यमराज के दरबार की ओर घसीटी जाती है। 348 दिनों की लंबी यात्रा में आत्मा को 16 पुरियों से होकर गुजरना पड़ता है, जहाँ प्रत्येक नगर में आधा मुहूर्त, लगभग 24 मिनट, का विश्राम मिलता है, पर यममार्ग स्वयं कठोर, दग्ध और छाया-विहीन बताया गया है।
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