विस्तृत उत्तर
मकर संक्रांति के दिन 'खिचड़ी' (मूंग की काली या छिलके वाली दाल, नए चावल, हल्दी, सेंधा नमक और घी का मिश्रण) का विशेष सात्विक भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त तिल और गुड़ से निर्मित मिष्ठान (लड्डू, गजक) भी अर्पित किए जाते हैं।
खिचड़ी का आयुर्वेदिक महत्व: शीतकाल में शरीर को ऊष्मा और सुपाच्य आहार की आवश्यकता होती है। खिचड़ी में चावल (कार्बोहाइड्रेट), मूंग या उड़द की दाल (प्रोटीन), हल्दी (एंटीसेप्टिक), और घी (स्वस्थ वसा) का संतुलित मिश्रण होता है जो त्रिदोष (वात, पित्त, और कफ) को संतुलित करती है।
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