विस्तृत उत्तर
भगवान को अर्पित किया गया भोजन 'नैवेद्य' कहलाता है और भगवान द्वारा ग्रहण किए जाने के बाद वह 'प्रसाद' बन जाता है। इसके विषय में शास्त्रों और परंपरा में स्पष्ट नियम हैं।
भोग के बाद कितनी देर प्रतीक्षा करें
- 1न्यूनतम 5-10 मिनट — भोग अर्पण के बाद कम से कम 5-10 मिनट तक भोग भगवान के समक्ष रहने दें। इस बीच मंत्र जप या स्तोत्र पाठ करें।
- 1आदर्श समय — 15-20 मिनट — कई परंपराओं में भोग अर्पित करने के बाद 15-20 मिनट की प्रतीक्षा उचित मानी जाती है।
- 1मंदिर परंपरा — बड़े मंदिरों में भोग लगने के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं और 30-45 मिनट बाद प्रसाद वितरण होता है। जैसे जगन्नाथ पुरी, तिरुपति आदि में यह व्यवस्थित प्रक्रिया है।
भोग लगाने की विधि
- 1भोजन बनाने के बाद सबसे पहले भगवान को भोग लगाएं — स्वयं चखकर नहीं।
- 2भोग स्वच्छ थाली या पत्ते में रखें।
- 3तुलसी दल (विष्णु भगवान के भोग में) रखना शुभ है।
- 4भोग के समय 'ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा, ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा' या 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणाहुतम्' (गीता 4.24) का पाठ करें।
- 5भोग के बाद घंटी बजाएं।
महत्वपूर्ण नियम
- ▸भगवान को भोग लगाए बिना भोजन न करें — 'देवपितृभ्यो अनुमत्य शेषं प्राश्नीयात्' अर्थात देव और पितरों को अर्पित करके शेष ग्रहण करें।
- ▸भोग का अन्न नीचे न गिरे, इसका ध्यान रखें।
- ▸भोग लगाने वाला व्यक्ति स्वच्छ और पवित्र हो।
- ▸प्रसाद को सम्मान से ग्रहण करें, भूमि पर न गिराएं।





